रोज़ सुबह आपकी दुकान की रिपोर्ट — WhatsApp पर।
बिल बनाइए, उधार लिखिए, स्टॉक देखिए। और हर सुबह सात बजे कल का पूरा हिसाब आपके WhatsApp पर — बिना कुछ खोले, बिना कुछ पूछे।
क्या-क्या करता है
| बिल | GST के तीनों तरीक़े — बिना रजिस्ट्रेशन, कंपोज़िशन, रेगुलर। थर्मल प्रिंटर पर सीधे। |
|---|---|
| उधार | किसका कितना बाक़ी है, तारीख़ के साथ पूरी लिस्ट। झगड़ा होने पर पढ़कर सुना दीजिए। |
| स्टॉक | क्या ख़त्म हो रहा है। हर बिल से अपने आप घटता है। |
| दो फ़ोन | काउंटर वाला और आपका — दोनों एक जैसे। तीन फ़ोन तक क़ीमत में शामिल। |
| सुबह की रिपोर्ट | कल कितनी बिक्री, कितनी वसूली, कितना उधार बाक़ी। WhatsApp पर। |
नेटवर्क बंद हो तब भी चलता है
बिल फ़ोन पर बनता है और फ़ोन पर ही छपता है। इंटरनेट आने पर अपने आप सिंक हो जाता है। बाड़मेर में सिग्नल नहीं है तो ग्राहक खड़ा नहीं रहेगा।
क़ीमत
जब चाहें बंद कीजिए। कोई लॉक-इन नहीं।
यानी दस महीने की क़ीमत में पूरा साल — दो महीने मुफ़्त।
तीन फ़ोन तक क़ीमत में शामिल हैं। चौथे से ₹99 महीना। भुगतान UPI Autopay से, Razorpay के ज़रिए।
पैसे न दें तो क्या होता है
बिल बनाना कभी बंद नहीं होता। उधार और स्टॉक भी चलते रहते हैं, और आपका डेटा कभी नहीं मिटता — export हमेशा खुला रहता है।
सात दिन तक कुछ भी नहीं बदलता। उसके बाद सुबह की रिपोर्ट, WhatsApp और दूसरे फ़ोन का मिलान रुक जाता है — पैसे आते ही सब वापस चालू।
शुरू कैसे करें
- Play Store से app इंस्टॉल कीजिए।
- Google से साइन इन करके अपनी दुकान का नाम डालिए।
- बिल बनाना शुरू। 30 दिन बाद यहीं से भुगतान कीजिए।
सवाल? support@digilekha.in